गीत – चाँद सा कोई चेहरा न पहलू में हो, तो चाँदनी का मज़ा नहीं आता ( क़व्वाली )
फ़िल्म – शोले ( 1975 )
संगीतकार – राहुलदेव बर्मन
गीतकार – आनन्द बख्शी
गायक – आनन्द बख्शी , किशोर कुमार , मन्ना डे , भूपेन्द्र

फ़िल्म ‘ शोले ‘ के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है और नया कुछ बताने जैसा नहीं है । सर्वकालिक ब्लाकबस्टर फ़िल्म अपने डायलाग्ज़ के लिये अत्यधिक प्रसिद्ध हुई थी । सिनेमेटोग्राफ़ी इसकी अत्यन्त उच्च स्तर की थी । फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड्स के लिये यह फ़िल्म नौ कैटेगरीज़ में नामिनेट हुई थी पर इसे केवल एक अवार्ड मिला था – बेस्ट एडिटिंग का एम एस शिन्दे को । शिन्दे एक माने हुये एडीटर थे । उन्होंने लगभग सौ फ़िल्मों की एडिटिंग की थी । सिप्पी फ़िल्म्स की अधिकांश फ़िल्में ( सीता और गीता , शान आदि ) उन्होंने एडिट की थी । दुखद बात यह कि बाद के दिनों में उनकी आर्थिक हालत बहुत ख़राब हो गयी थी । ग़रीबी से जूझते हुये बड़ी उपेक्षित हालत में उन्होंने इस दुनिया से बिदा ली ।
‘शोले’ को फ़िल्मफ़ेयर ने वर्ष 1975 की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म नहीं माना था । उस वर्ष यह अवार्ड फ़िल्म ‘ दीवार ‘ को गया था । कैसा विरोधाभास है कि जिस फ़िल्म को वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म नहीं माना गया उस फ़िल्म को फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड्स के 50 वर्ष पूरे होने पर 2005 में मनाये गये फ़ंक्शन में पिछले पचास वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का अवार्ड दिया गया ।

गीतकार आनन्द बख्शी को गायन का भी शौक़ था । बालिका वधु , चरस , मोम की गुड़िया आदि फ़िल्मों में उन्होंने कुछ गीत गाये थे । ‘ शोले ‘ की एक क़व्वाली में भी आनन्द बख़्शी की आवाज़ शामिल थी । फ़िल्म की लम्बाई अधिक हो जाने के कारण यह क़व्वाली फ़िल्म में शामिल नहीं की गई थी । इसका केवल आडियो उपलब्ध है । यू ट्यूब में दिखाया गया वीडियो इस फ़िल्म का नहीं है । आनन्द बख़्शी के साथ इस क़व्वाली में किशोर कुमार , मन्ना डे और भूपेन्द्र की आवाज़ें भी सम्मिलित हैं।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी

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