गीत – आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर
फ़िल्म – ब्रह्मचारी (1968)
संगीतकार – शंकर जयकिशन
गीतकार – शैलेन्द्र
गायक – मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर

हिन्दी फ़िल्म संगीत के स्वर्णिम काल में नायकों की त्रिमूर्ती दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनन्द के पसंद के अपने अपने संगीतकार थे। दिलीप कुमार के नौशाद, राज कपूर के शंकर जयकिशन और देव आनन्द के सचिनदेव बर्मन। नवकेतन की फ़िल्मों में कभी नौशाद या शंकर जयकिशन का संगीत नहीं रहा। उसी तरह आर के फ़िल्म्स में कभी नौशाद या सचिनदेव बर्मन ने संगीत निर्देशन नहीं किया। परन्तु जब ये कलाकार दूसरे निर्माताओं के बैनर में अभिनय करते तो अन्य संगीतकारों के साथ काम करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती थी। देव आनन्द की बाहर के बैनर्स की कई फ़िल्मों में शंकर जयकिशन ने संगीत दिया था , जैसे- पतिता (1953), जब प्यार किसी से होता है (1961), रूप की रानी चोरों का राजा (1961), असली नक़ली (1962), प्यार मोहब्बत (1966), कहीं और चल (1968), दुनिया (1968) वग़ैरह।

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देव आनन्द पर्दे पर अपनी छवि को ले कर काफ़ी सतर्क रहते थे। फ़िल्म -‘बनारसी बाबू‘ (1973, देव आनन्द, राखी, योगिता बाली) में कल्याणजी आनन्दजी के गीत ‘खई के पान बनारस वाला, खुल जाये बन्द अक़ल का ताला’ को उन्होंने अपनी छवि से मेल न खाने के कारण, रिजेक्ट कर दिया था। आगे चल कर ‘डॉन‘ (1978) में इस गीत ने भरपूर प्रसिद्धि पाई थी।

निर्माता, निर्देशक नासिर हुसैन की फ़िल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ के लिये शंकर जयकिशन ने गीत बनाया था- ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर’, जो देव आनन्द और आशा पारेख पर फ़िल्माया जाना था। परन्तु यह गीत देव आनन्द को पसंद नहीं आया। (नेट पर कुछ जगह एक ग़लत जानकारी भी मौजूद है कि यह गीत राजेन्द्र कुमार की फ़िल्म ‘सूरज’ के लिये बना था और उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था)। देव आनन्द के द्वारा अपना गीत नापसंद कर दिये जाने पर जयकिशन थोड़े दुखी थे। उन्होंने शाम की बैठक में अपने मित्र शम्मी कपूर से इसका ज़िक्र किया।

Shammi Kapoor King Of Romance- Documentary

शम्मी कपूर ने जब यह गीत सुना तो उन्हें बड़ा अच्छा लगा। उन्होंने उसे अपनी फ़िल्म ‘बदतमीज़‘ (शम्मी कपूर, साधना) के लिये माँग लिया। निर्देशक मनमोहन देसाई भी पहले इसके लिये तैयार थे लेकिन फ़िल्म के को-प्रोड्यूसर की असमय मृत्यु से उत्पन्न आर्थिक तंगी के कारण वे इस अतिरिक्त गीत का फ़िल्मांकन ना कर सके। अब शम्मी कपूर ने निर्माता जी पी सिप्पी और निर्देशक भप्पी सोनी से इस गीत के बारे में चर्चा की। उनके साथ वे ‘ब्रह्मचारी‘ में काम कर रहे थे। भप्पी सोनी को गीत पसंद आया लेकिन कहानी के अनुसार यह नायिका राजश्री पर नहीं फ़िल्माया जा सकता था। अन्तत: उस गीत के लिये फ़िल्म में सिचुएशन बना कर शम्मी कपूर और मुमताज़ के ऊपर यह नृत्यगीत फ़िल्माने का निर्णय लिया गया। फ़िल्म प्रदर्शित होने पर शम्मी कपूर की पसन्द पर दर्शकों ने अपनी स्वीकृति की मोहर भी लगा दी। यह गीत सुपरहिट साबित हुआ।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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