गीत – कभी न कभी , कहीं न कहीं , कोई न कोई तो आयेगा
फ़िल्म – शराबी (1964)
संगीतकार – मदनमोहन
गीतकार – राजेन्द्र कृष्ण
गायक – मोहम्मद रफ़ी

‘झूठ बोले कौआ काटे, काले कौवे से डरियो’ (बॉबी, 1973) के गीतकार विट्ठलभाई पटेल के पुत्र संजय विट्ठलभाई पटेल ने कुछ दिन पहले फ़ेसबुक पर कविराज शैलेंद्र का हस्तलिखित एक गीत पोस्ट किया था जिसे उन्होंने फ़िल्म ‘संगम‘ (1964, राजकपूर, वैजयंतीमाला, राजेन्द्र कुमार) के लिये लिखा था। यह गीत मुकेश और लता मंगेशकर ने गाया था –

letter written by Shailendra to Raj Kapoor-Bollywoodirect

‘संगम’
गायक – मुकेश, लता मंगेशकर
कभी न कभी , कोई न कोई
कहीं न कहीं से आयेगा
तूने इतने सपने देखे
एक तो सच होगा
एक तो मोती बन के रहेगा
आँख इतने आँसू रोई । कभी …..

कुछ दिन पहले हम भी अकेले
ऐसे ही दुखड़े सहते थे
साँझ सबेरे लेकिन अपने
दिल से यही हम कहते थे । कभी ……

इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुये गीतकार शैलेंद्र के छोटे बेटे दिनेश शंकर शैलेंद्र ने टिप्पणी दी थी – ”राजकपूर साहब ने ग़लती से, नशे में कहीं सुना दिया था ………. चोरी हो गया ये गाना …….”। बाद में उन्होंने आगे बताया था कि उन्होंने ट्रायल शो में पर्दे पर यह गीत देखा था। ‘संगम’ में राजकपूर और वैजयंतीमाला जब विवाह के बाद गोण्डोला में बैठ कर वेनिस की सैर कर रहे होते हैं तब उस गीत की बैकग्राउण्ड में बजती धुन सुनी जा सकती है।  संभवत: यह गीत हनीमून मनाते राज – वैजयन्ती पर विदेशी लोकेशन्स पर फ़िल्माया गया था। लेकिन 1964 में ही रिलीज़ हुयी दो फ़िल्मों में इस गीत से मिलते जुलते गीत आ गये थे अत: यह गीत ‘संगम’ से हटा दिया गया।

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शक्ति सामंत की फ़िल्म ‘कश्मीर की कली‘ (1964, शम्मी कपूर, शर्मीला टैगोर) में गीतकार एस एच बिहारी ने एक गीत लिखा था – ‘किसी न किसी से, कभी न कभी, कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा (मोहम्मद रफ़ी, ओ पी नय्यर)।

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निर्देशक राजऋषि की फ़िल्म ‘शराबी’ भी उसी वर्ष रिलीज़ हुयी थी। देव आनन्द के साथ इसमें मधुबाला नायिका थीं। मधुबाला की अंतिम फ़िल्मों में यह एक थी। मधुबाला की मृत्यु के बाद डुप्लीकेट की मदद से पूरी की गयी फ़िल्म ‘ज्वाला’ (1970, सुनील दत्त) भर ‘शराबी’ के बाद रिलीज़ हुयी थी। ‘दिल देके देखो’ में नायिका बनने से पहले आशा पारेख ने ‘ज्वाला’ और ‘आशा’ (किशोर कुमार, वैजयंतीमाला) फ़िल्मों में छोटी छोटी भूमिकायें निभाईं थीं।

फ़िल्म ‘शराबी’ के लिये मदनमोहन के संगीत निर्देशन में गीतकार राजेन्द्र कृष्ण ने ‘संगम’ के एडीटेड गीत से प्रभावित यह गीत लिखा था – कभी न कभी, कहीं न कहीं, कोई न कोई तो आयेगा, अपना मुझे बनायेगा।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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