गीत – रुत फिरे पर दिन हमारे
फिरे ना, फिरे ना, फिरे ना
फ़िल्म – प्यासा (1957)
संगीतकार – सचिनदेव बर्मन
गीतकार – साहिर लुधियानवी
गायिका – गीतादत्त

गुरुदत्त की फ़िल्म ‘प्यासा‘ (1957) को ‘टाइम’ पत्रिका ने विश्व की सर्वकालिक 100 श्रेष्ठ फ़िल्मों में एक माना है। लेकिन 1957 में उसे कोई फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड नहीं मिला था। वहीदा रहमान को सर्वश्रेष्ठ सह नायिका के अवार्ड के लिये नाॅमिनेट किया जा रहा था। फ़िल्मफ़ेयर की तरफ़ से जब वहीदा रहमान को यह सूचना दी गयी तो उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुयी कि उनके अभिनय को सराहा जा रहा ह । जब यह ख़बर गुरुदत्त साहब को दी गयी तो उनकी प्रतिक्रिया कुछ अलग थी। उन्होंने कहा कि वहीदा रहमान फ़िल्म की सहनायिका नहीं हैं। ‘प्यासा’ में दो नायिकायें हैं और वहीदा दूसरी नायिका हैं। फ़िल्मफ़ेयर के जे सी जैन ने उन्हें समझाना चाहा कि माला सिन्हा सीनियर हैं और वहीदा रहमान नई हैं। पर गुरुदत्त ने स्पष्ट कह दिया कि वहीदा को मैं यह नाॅमिनेशन स्वीकार नहीं करने दूँगा। वहीदा रहमान को पहले कुछ बुरा लगा और निराशा हुयी। पर उन्हें गुरुदत्त ने समझाया कि मैं नहीं चाहता कि तुम्हें सहनायिका समझा जाये। इस फ़िल्मी दुनिया में बहुत जल्दी कलाकारों पर ठप्पा लग जाता है।

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‘प्यासा’ में वहीदा रहमान पर गीतादत्त का गाया हुआ एक बड़ा प्यारा गीत फ़िल्माया गया था -‘रुत फिरे पर दिन हमारे, फिरे ना, फिरे ना, फिरे ना।’ फ़िल्म में नायक गुरुदत्त की मृत्यु की ख़बर जब गुलाबो (वहीदा रहमान) को मिलती है तब वह एक नाव में बैठ कर यह गीत गाती है।

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‘प्यासा’ रिलीज़ होने से पहले उसका एक ‘ट्रायल शो’ रखा गया था। उसमें सब लोगों से उनकी प्रतिक्रिया पूछी जा रही थी। वहीदा रहमान ने कहा कि यह गाना बहुत सुन्दर है पर फ़िल्म में यह खटक रहा है। दर्शक नायक की मौत की ख़बर सुन कर जानना चाहेंगे कि आगे क्या हुआ? यह ख़बर सच है या नहीं? इस सिचुएशन में यह गाना कहानी में बाधक हो जायेगा। तब वहीदा रहमान नई नई थीं। लोगों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया और फ़िल्म उस गाने के साथ प्रदर्शित कर दी गयी। परन्तु एक सप्ताह बाद गुरुदत्त ने वह गीत फ़िल्म से हटा दिया। उन्होंने सिनेमाघरों में दर्शकों की प्रतिक्रिया देख कर यह निर्णय लिया था। जब यह गीत चलता था तो कई दर्शक सिगरेट पीने या टाॅयलेट जाने के लिये सिनेमाहाॅल से बाहर निकलने लगते थे। वाक़ई उस गीत के कारण कहानी का ‘फ्लो’ बाधित हो रहा था। वहीदा जी ने पहले जो अपनी राय दी थी वह बिल्कुल सही साबित हुयी।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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