गीत – किसी नरगिसी नज़र को दिल देंगे हम
फ़िल्म – मैं नशे में हूँ
संगीतकार – शंकर जयकिशन
गीतकार – हसरत जयपुरी
गायक – मुकेश

सिनेमा के पर्दे की कई मशहूर जोड़ियाँ रही हैं – देव आनन्द – सुरैया , दिलीप कुमार – मधुबाला, गुरुदत्त – वहीदा रहमान, धर्मेन्द्र – हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन – रेखा, राजेश खन्ना – मुमताज़, शत्रुघ्न सिन्हा – रीना राय, महमूद – शोभा खोटे आदि । लेकिन जो जादू राज कपूर – नर्गिस की जोड़ी ने जगाया वह अतुलनीय है। ये दोनों कुल 17 फ़िल्मों में साथ आये जिसमें ‘जागते रहो‘ (बांगला वर्शन – ‘एक दिन रात्रे’) में नर्गिस मेहमान भूमिका में थीं।

बतौर नायक नायिका उनकी फ़िल्में हैं – आग , बरसात , अन्दाज़ , प्यार , जान पहचान , आवारा , बेवफ़ा , आशियाना , अनहोनी , अम्बर , पापी , धुन , आह , श्री 420 और चोरी चोरी। पर्दे का रोमांस उनकी निजि ज़िन्दगी में भी उतर आया था। उनके प्यार के चर्चे बड़े मशहूर रहे। लेकिन राज कपूर के विवाहित होने के कारण बात आगे न बढ़ सकी। 1956 में ‘चोरी चोरी’ उनकी अंतिम फ़िल्म थी उसके बाद वे दोनों अपनी अपनी ज़िन्दगी में अलग दिशाओं में आगे बढ़ गये और पर्दे पर फिर साथ नज़र ना आये। ‘मदर इण्डिया‘ के बाद नर्गिस की ज़िन्दगी में सुनील दत्त आये और दोनों 11 मार्च 1958 को विवाह बंधन में बंध गये।

निर्माता महिपत राय शाह और निर्देशक नरेश सहगल ने राज कपूर और माला सिन्हा को ले कर एक फ़िल्म ‘ मैं नशे में हूँ ‘ (1959) का निर्माण किया था। यद्यपि फ़िल्म की नायिका माला सिन्हा थीं पर नरेश सहगल राज कपूर – नर्गिस की प्रेम कहानी की याद दिला कर दर्शकों को लुभाना चाह रहे थे। उन्होंने हसरत जयपुरी से एक गीत लिखवाया तथा उसे राज कपूर पर फ़िल्माने के लिये मुकेश की आवाज़ में रिकार्ड करवा लिया –

किसी नरगिसी नज़र को दिल देंगे हम
काली ज़ुल्फ़ के साये में दम लेंगे हम
अय हसीं तेरे हर सितम सहेंगे हम
आ भी जा कि तेरी राह में खड़े हैं हम

हम ज़रूर पायेंगे इक नई बहार
कम नहीं जहां में हुस्न वाले हैं हज़ार
कर रहे हैं आज हम जिसका इंतज़ार
ख़ुद चली आयेगी वो हो के बेक़रार

राज कपूर ने जब वह गीत सुना तो उन्होंने उसे पर्दे पर गाने से इंकार कर दिया। वे प्यार की गरिमा को इस तरह कम करने तैयार न थे। अपने उद्देश्य में सफल न हो पाने पर निर्देशक नरेश सहगल ने अंततः वह गीत हास्य अभिनेता मारुति पर फ़िल्मा कर अपनी फ़िल्म ‘ मैं नशे में हूँ ‘ में रखा।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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