गीत – सदियों से दुनिया में यही तो क़िस्सा है
एक ही तो लड़की है , एक ही तो लड़का है
जब भी ये मिल गये प्यार हो गया
फ़िल्म – बीवी ओ बीवी (1981)
संगीतकार – राहुल देव बर्मन
गीतकार – निदा फ़ाज़ली
गायक – किशोर कुमार

निर्माता राज कपूर के बैनर आर के फ़िल्म्स के झंडे तले ऐसी फ़िल्में भी बनती रहीं जिनके निर्देशक राज कपूर स्वयं नहीं थे। उन्होंने दूसरे प्रतिभावान निर्देशकों को अवसर प्रदान किये , जैसे- राजा नवाथे (आह), प्रकाश अरोरा (बूट पाॅलिश), अमर कुमार (अब दिल्ली दूर नहीं), अमित मोइत्रा और शम्भु मित्र (जागते रहो), राधू कर्माकर (जिस देश में गंगा बहती है)। राज साहब के बाद उनके पुत्रों ने भी आर के के बैनर में फ़िल्में निर्देशित कीं – रणधीर कपूर (कल आज और कल, धरम करम, हिना), राजीव कपूर (प्रेम ग्रंथ), ऋषि कपूर (आ अब लौट चलें)। फ़िल्म ‘प्रेम रोग’ जब शुरू हुई तब इसके निर्देशक जैनेन्द्र जैन थे जिन्होंने इस फ़िल्म के लेखन में भी सहयोग दिया था। पर बाद में उनके काम से संतुष्ट न हो कर राज कपूर ने ख़ुद निर्देशन की कमान संभाल ली थी। जैनेन्द्र जैन ने पत्रकार के रूप में ‘माधुरी’/ टाइम्स ग्रुप में काम किया था और ‘बाॅबी‘ लेखक के रूप में उनकी पहली फ़िल्म थी।

आर के फ़िल्म्स की ‘बीवी ओ बीवी’ (1981) एक ऐसी ही फ़िल्म थी जिसके निर्देशक राहुल रवेल थे। इस कामेडी फ़िल्म के कलाकार थे – संजीव कुमार, रणधीर कपूर, पूनम ढिल्लन, योगिता बाली, सिमी ग्रेवाल, राजेन्द्र नाथ, शशिकला आदि। संगीत राहुल देव बर्मन ने तैयार किया था जिनके लिये गीत बिट्ठलभाई पटेल और निदा फ़ाज़ली ने लिखे थे।

निदा फ़ाज़ली एक अव्वल दर्जे के शायर थे। गायक जगजीत सिंह ने उनकी लिखी कई ग़ज़लें और दोहे आदि गाये थे – मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार, हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी, गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला, सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो। निदा फ़ाज़ली ने कुछ फ़िल्मों के लिये भी गीत लिखे। उनकी पहली फ़िल्म कमाल अमरोही की ‘रज़िया सुल्तान‘ थी जिसमें उन्होंने दो गीत लिखे थे – तेरा हिज़्र मेरा नसीब है (कव्वन मिर्ज़ा) और हरियाला बन्ना आया। फ़िल्म ‘आहिस्ता आहिस्ता’ का उनका लिखा एक अन्य मशहूर गीत है जिसे भूपेन्द्र और आशा भोंसले ने अलग अलग गाया है (टैण्डम सांग )- कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता, कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता

राहुल देव बर्मन , राहुल रवेल , रणधीर कपूर ने मिल कर निर्णय लिया था कि ‘बीवी ओ बीवी’ में निदा फ़ाज़ली भी गीत लिखेंगे। निदा साहब ने एक गीत लिख कर दिया जो इन लोगों को पसंद भी आया। गीत की रिकार्डिंग की तैयारी शुरू होने वाली थी कि राज कपूर साहब ने ख़बर भिजवाई कि वे निदा फ़ाज़ली से बात कर ख़ुद उन्हें गीत की सिचुयेशन समझायेंगे जिस पर उन्हें गीत लिखना पड़ेगा। उन्हें पसंद आने पर ही गीत रिकार्ड होगा। निदा फ़ाज़ली राज कपूर से मिलने से पहले थोड़े नर्वस थे। राज साहब ने आते ही निदा फ़ाज़ली को गाने की सिचुयेशन यूँ समझाई, ”एक लड़का था, एक लड़की थी। दोनों मिले और उन्हें प्यार हो गया’‘ और कहा ,’ जाइये अब इस सिचुयेशन पर गीत लिख लाइये।’

निदा साहब ने जो गीत लिखा वह राज साहब को पसंद आ गया – सदियों से दुनिया में यही तो क़िस्सा है, एक ही तो लड़की है , एक ही तो लड़का है, जब भी ये मिल गये , प्यार हो गया।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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