गीत – वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम , हम रहे न हम
फ़िल्म – काग़ज़ के फूल
संगीतकार – सचिन देव बर्मन
गीतकार – कैफ़ी आज़मी
गायिका – गीता दत्त

फ़िल्म ‘प्यास‘ की सफलता के बाद गुरुदत्त ने फ़िल्म ‘गौरी‘ (1957) का निर्माण शुरू किया था। उनकी पत्नी गीतादत्त उस फ़िल्म की नायिका थीं और संगीत सचिनदेव बर्मन का था। ‘गौरी’ की कहानी की पृष्ठभूमि में कलकत्ता शहर था। एक सफल मूर्तीकार देवी दुर्गा की अत्यन्त सुन्दर प्रतिमायें बनाने के लिये मशहूर था। एक बार उसकी भेंट एक ऐसी लड़की से होती है जिसका चेहरा उसे हूबहू अपनी बनाई देवी की मूर्तियों के चेहरे जैसा प्रतीत होता है। अनायास ही वह उसकी ओर आकर्षित हो जाता है। बाद में यह जान कर उसे आश्चर्य होता है कि वह लड़की एक वेश्या है। सब कुछ जान कर भी वह उसके प्रति अपने प्रेम को नहीं रोक पाता है और उसके साथ विवाह कर लेता है। अपनी पत्नी के अतीत को वह अपने माता पिता से छुपा कर रखता है लेकिन उसके एक ब्लैकमेलर दोस्त से यह राज़ उन्हें पता चल जाता है। माता पिता अपनी पुत्रवधु की सचाई को स्वीकार नहीं कर पाते हैं और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं। लगातार अपने अपमान और लांछन से आहत वह एक दिन चुपचाप घर छोड़ कर चली जाती है।

मूर्तीकार उसे भुला नहीं पाता है। जब भी वह मूर्तियाँ गढ़ता है उसकी पत्नी ‘गौरी’ का चेहरा उसके ख़यालों में आ कर उसे परेशान करता रहता है। बरसों बाद एक बार जब वह जुलूस में दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन हेतु जा रहा था तब उसे एक शवयात्रा जाती हुई दिखलाई पड़ती है। उस मृतदेह का चेहरा देख कर वह जड़वत रह जाता है । वह उसकी पत्नी की शवयात्रा थी। गुरुदत्त और गीतादत्त के वैवाहिक जीवन के तनाव और दोनों के बीच बढ़ती दूरियों के कारण ‘ गौरी ‘ पूरी ना बन सकी। उसे अधूरा छोड़ दिया गया।

बाद में गुरुदत्त और गीतादत्त के छोटे बेटे अरुण दत्त ने अपनी बेटी का नाम ‘गौरी’ रखा। एक अधूरी कहानी इस तरह पूरी हुई। ‘गौरी’ का निर्माण सिनेमास्कोप में हो रहा था। अगर यह फ़िल्म पूरी बन जाती तो भारत की पहली सिनेमास्कोप फ़िल्म होने का गौरव इसे प्राप्त होता। यह श्रेय दो साल बाद गुरुदत्त की फ़िल्म ‘काग़ज़ के फूल’ को मिला। गीतादत्त का गाया ‘काग़ज़ के फूल’ का एक गीत उनकी निजि ज़िन्दगी को भी एकदम सही ढंग से बयान कर जाता है – वक़्त ने किया क्या हसीं सितम, तुम रहे ना तुम, हम रहे ना हम।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी 

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