गीत – मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियाँ हैं
फ़िल्म – चाँदनी (1989)
संगीतकार – शिव हरि
गीतकार – आनन्द बख़्शी
गायिका – लता मंगेशकर

आर के फ़िल्म्स ‘बूट पॉलिश‘(1953) के लिये हसरत जयपुरी ने एक गीत लिखा था -‘मैं बहारों की नटखट रानी, सारी दुनिया है मुझपे दीवानी।’ लता मंगेशकर को ये बोल पसंद नहीं आये। उन्हें इनमें सस्तापन नज़र आया और उन्होंने गीत गाने से इंकार कर दिया। उनके मना करने पर यह गीत आशा भोंसले की आवाज़ में रिकार्ड कराया गया। फिर न केवल यह गीत बल्कि ‘बूट पॉलिश’ के सारे गीत आशा भोंसले ने गाये। 

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लता मंगेशकर गीत के बोलों को ले कर बेहद सावधान रहती थीं। थोड़ा भी अश्लीलता का पुट होने से वे उन बोलों को बदलने का सुझाव देतीं अथवा वह गीत रिकार्ड करने से इंकार कर देतीं। निर्माता जे ओमप्रकाश की फ़िल्म ‘आँखों आँखों में‘ (1972) के एक गीत की रिकार्डिंग होनी थी। फ़िल्म में जे ओमप्रकाश के दामाद राकेश रोशन के साथ राखी नायिका थीं। राखी पर फ़िल्माये जाने वाले जिस गीत की रिकार्डिंग थी उसे वर्मा मलिक ने लिखा था –

गया बचपन जो आयी जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
मैंने कल जो सिलाई थी चोली
वो चोली आज तंग हो गयी.

लता मंगेशकर के सामने जब ये पंक्तियाँ आयीं तो उनके चेहरे पर सख़्ती आ गयी। उन्होंने वर्मा मलिक से कहा कि वे उनके लिये इस तरह के बोल ना लिखा करें। जे ओमप्रकाश ने उन्हें समझाना चाहा कि ‘चोली’ को ‘कुर्ती’ कर देते हैं। पर यह भी उन्हें स्वीकार नहीं था। संगीतकार जयकिशन ने भी तर्क दिया कि इस तरह का संदर्भ तो कालिदास की रचनाओं में भी आता है। शंकुन्तला व उनकी सखियों के वार्तालाप में चोली तंग होने का वर्णन है। लेकिन लता मंगेशकर को उनके निर्णय से कोई तर्क न डिगा सका। अंत में वर्मा मलिक ने गीत के बोल बदल कर लिखे –

गया बचपन जो आयी जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
ऐसी पलकों में छाई जो मस्ती
तबीयत मलंग हो गयी 

इन बदले हुये बोलों को लता मंगेशकर के स्वर में रिकार्ड किया गया। फ़िल्म के अन्य सारे गीत फिर आशा भोंसले ने गाये। उपरोक्त घटना के लगभग 17 वर्ष बाद निर्माता यश चोपड़ा की फ़िल्म ‘चाँदनी‘ (1989, श्रीदेवी, ऋषि कपूर, विनोद खन्ना) में लता मंगेशकर ने एक गीत रिकार्ड कराया।

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वक़्त के साथ शायद उनका नज़रिया बदल गया था। या बदलते ज़माने और समाज में आये खुलेपन को उन्होंने स्वीकार कर लिया था। गीतकार आनन्द बख़्शी के लिखे गीत के बोल फ़िल्म ‘आँखों आँखों में’ के लिये लिखे वर्मा मलिक के मूल गीत के समान थे –

मेरे दर्ज़ी से आज मेरी जंग हो गयी
कल चोली सिलाई आज तंग हो गयी
करे वो क्या तू लड़की थी
अब पतंग हो गयी
मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियाँ हैं
ज़रा समझो सजन मजबूरियाँ हैं।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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