गीत – दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे
फ़िल्म – नरसी भगत (1957)
संगीतकार – रवि
गीतकार – गोपाल सिंह नेपाली
गायक – हेमन्त कुमार, सुधा मल्होत्रा, मन्ना डे

नरसी भगत पन्द्रहवीं शताब्दी में गुजरात के प्रसिद्ध भक्त कवि हुये हैं। उन्हें नरसी या नरसिंह मेहता के नाम से भी जाना जाता है। उनके कृष्ण भक्ति के पद गुजरात में जनमानस के बीच अत्यन्त प्रिय हैं। उनकी सारी रचनायें गुजराती भाषा में हैं। गुजराती में होने पर भी उनका एक भजन देश और भाषा की सारी सीमायें पार कर अमर हो गया –

वैष्णव जन तो तैने कहिये
जे पीड परायी जाणे रे
पर दुःखे उपकार करे तो
ये मन अभिमान न आणे रे।

बापू का यह प्रिय भजन था। कई गायकों ने इसे अपने अपने ढंग से गाया है – एम एस सुब्बुलक्ष्मी, लता मंगेशकर, मन्ना डे, जगजीत सिंह जिनमें प्रमुख हैं। इसे कई फ़िल्मों में भी शामिल किया गया है जैसे ‘गांधी’ (1982), ‘वाटर ‘ (2005), ‘रोड टू संगम ‘ (2009 ), ‘हे राम’ (2000), ‘नरसी भगत’ (1940, 1957) आदि।हिन्दी में ‘नरसी भगत’ के नाम से दो बार फ़िल्में बनी हैं। विजय भट्ट के निर्देशन में बनी 1940 की फ़िल्म में दुर्गा खोटे, विष्णु पंत पगनीस, अमीर बाई कर्नाटकी ने अभिनय किया था। 1957 में इसे शाहू मोडक, निरूपाराय को ले कर निर्देशक देवेन्द्र गोयल ने बनाया था। 1957 वाली ‘नरसी भगत’ के गीतकार गोपाल सिंह नेपाली और संगीतकार रवि ने कुछ बड़े प्यारे भक्तिगीत बनाये थे – सबकी नैया पार लगैया कृष्ण कन्हैया साँवरे, रामधुन लागी गोपालधुन लागी (मन्ना डे, आशा भोंसले), जय गोविन्दा गोपाला (मोहम्मद रफी), राधा के रसिया गोकुल के बसिया (सुधा मल्होत्रा)। इनके साथ नरसी मेहता का भजन वैष्णव जन तो तैने कहिये (मन्ना डे) और दर्शन दो घनश्याम नाथ (हेमन्त कुमार, सुधा मल्होत्रा, मन्ना डे) अन्य कालजयी रचनायें हैं।

स्लमडाग मिलियेनेयर‘ ( 2008 ) एक बहुचर्चित ब्रिटिश ड्रामा फ़िल्म है जिसे आठ आॅस्कर अवार्ड मिले हैं। इसमें बेस्ट पिक्चर, डायरेक्टर, स्क्रीनप्ले राइटर, सिनेमेटोग्राफ़र, एडीटर के साथ साथ बेस्ट ओरिजिनल सांग के लिये ए आर रहमान और गुलज़ार (गीत – जय हो) के नाम भी शामिल हैं। इस फ़िल्म में अनिल कपूर, इरफ़ान खान, देव पटेल, फ़्रीडा पिण्टो, मधुर मित्तल ने अभिनय किया था। ‘स्लमडाग मिलियेनेयर’ फ़िल्म में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसी प्रश्नोत्तर की प्रतियोगिता में एंकर अनिल कपूर प्रतियोगी देव पटेल से प्रश्न पूछते जाते हैं और मुम्बई के स्लम एरिया का रहनेवाला वह किशोर सारे प्रश्नों के सही जवाब दे कर विजयी होता है।

अनिल कपूर द्वारा पूछे गये प्रश्नों में एक प्रश्न था कि ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे’ भजन किसने लिखा है? फ़िल्म में इस भजन को भक्त सूरदास द्वारा रचित बताया जाता है। दरअसल यह जवाब ग़लत था। इस भजन के असली गीतकार गोपाल सिंह नेपाली हैं जिन्होंने फ़िल्म ‘नरसी भगत’ (1957) के लिये इस गीत को लिखा था। वैसे यह गर्व की बात है कि उनके लिखे गीत को भक्त सूरदास का पद समझा गया। इस गीत के दो पहलू हैं – पहला वर्शन हेमन्त कुमार, मन्ना डे, सुधा मल्होत्रा की आवाज़ों में है तथा दूसरा सोलो वर्शन मन्ना डे के स्वर में है।

कुछ जगह इस भजन को स्वयं नरसी मेहता द्वारा लिखित बताया गया है। लेकिन नरसी मेहता केवल गुजराती भाषा में गीत रचना किया करते थे। अमीन सयानी के एक इंटरव्यू में संगीतकार रवि ने इस बात की पुष्टि की थी कि इस भजन को गोपाल सिंह नेपाली ने लिखा था।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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