गीत – चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो
हम हैं तैयार चलो
फ़िल्म – पाकीज़ा (1972)
संगीतकार – ग़ुलाम मोहम्मद
गीतकार – कैफ़ भोपाली
गायिका – लता मंगेशकर (सोलो, टैण्डम सांग)

पाकीज़ा‘ 4 फ़रवरी 1972 को रिलीज़ हुई थी और बाक्स आॅफिस पर इसका बड़ा कमज़ोर प्रदर्शन रहा था। कई सिनेमाघरों से कुछ हफ़्तों में ही यह उतार दी गई थी। दैवयोग से 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी साहिबा का देहान्त हो गया। एकाएक दर्शकों की सहानुभूति की लहर में सवार हो यह फ़िल्म फिर से सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई और बाॅक्स आॅफिस पर सफलता के झण्डे गाड़ दिये।

इसके संगीत को अपार लोकप्रियता हासिल हुई। लेकिन दुर्भाग्य से इसकी सफलता का उपभोग करने के लिये संगीतकार ग़ुलाम मोहम्मद ज़िन्दा न थे। उनका इन्तक़ाल 17 मार्च 1968 को लगभग चार साल पहले हो चुका था। फ़िल्म के सारे गीत वे साठ के दशक में अपनी मृत्यु से पूर्व रिकार्ड करवा चुके थे। केवल फ़िल्म का बैकग्राउण्ड म्यूज़िक संगीतकार नौशाद ने तैयार किया। बैकग्राउण्ड में बजने के लिये उन्होंने कुछ गीत भी रिकार्ड किये – नज़रिया की मारी मरी मोरी गुईं़या (राज कुमारी), कौन गली गयो श्याम (परवीन सुल्ताना), मोरा साजन सौतन घर जाये (वाणी जयराम), इश्क़ एक मीर भारी पत्थर है, कब ये तुझ नातवां से उठता है (नसीम बानो चोपड़ा) आदि। इन सभी गीतों की मात्र झलक कोठों के दृश्यों में बैकग्राउण्ड में सुनाई पड़ती है।

ग़ुलाम मोहम्मद अपने जीवनकाल में ‘पाकीज़ा’ के 15 गाने रिकार्ड करवा गये थे। इन गानों में केवल छः गाने फ़िल्म में रखे गये – इन्हीं लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा, यूँ ही कोई मिल गया था सरेराह चलते चलते, मौसम है आशिक़ाना, चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो, ठांड़े रहियो ओ बाँके यार रे तथा आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे। इन मधुर गीतों ने फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद धूम मचा दी और आज भी उनका ख़ुमार बाक़ी है। लेकिन फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ संगीत का अवार्ड ‘पाकीज़ा’ को न मिल कर उस वर्ष ‘बेईमान‘ को मिला था। इस बेईमानी के ख़िलाफ़ विरोध स्वरूप अभिनेता प्राण ने सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता (बेईमान) का अवार्ड लेने से इंकार कर दिया था।

ग़ुलाम मोहम्मद के द्वारा तैयार शेष नौ गीतों का एक एलबम ‘पाकीज़ा रंग ब रंग‘ नाम से एच एम व्ही ने रिलीज़ किया था। इसके सारे गीत एक से बढ़ कर एक थे –

पी के चले ये चले – लता मंगेशकर
ये किसकी आँखों का नूर हो तुम – मो रफी
बंधन बाँधो – शोभा गुर्टू
हट कर तेरे क़दमों से (क़व्वाली) – मो रफी, शमशाद बेग़म
तन्हाई सुनाया करती है – लता मंगेशकर
प्यारे बाबुल तुम्हारी दुहाई – लता मंगेशकर
लेके अँगड़ाई सरेबज़्म बहुत पछताई – सुमन कल्याणपुर
कोठे से बड़ा – शमशाद बेग़म

चलो दिलदार चलो, चाँद के पार चलो – फ़िल्म ‘पाकीज़ा’ का एक टैण्डम सांग था। इसका मोहम्मद रफी व लता मंगेशकर का गाया डुएट वर्शन फ़िल्म में था लेकिन लता जी की आवाज़ का सोलो वर्शन फ़िल्म में नहीं था। ‘आज के गीत’ में लता मंगेशकर के गाये इसी गीत का लुत्फ़ उठाइये।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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