गीत- गाओ गाओ गाओ , झूम के गाओ
भूल दर्द ग़म, मुस्कुराओ
फ़िल्म- मेरा नाम जोकर
संगीतकार- शंकर जयकिशन
गीतकार- नीरज
गायक- मुकेश, शारदा

गायिका शारदा को राज कपूर ने पहली बार तेहरान में डिस्ट्रीब्यूटर श्रीचंद हिन्दूजा की एक पार्टी में गाते सुना। उनकी विशिष्ट गायन शैली और सबसे जुदा आवाज़ ने उनका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने शारदा को बम्बई आ कर मिलने का न्योता दिया। बम्बई में राज कपूर ने शारदा का वाॅयस टेस्ट (माइक्रोफ़ोन टेस्ट) लिया। उस समय कपूर परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। तब शारदा ने फ़िल्म ‘बरसात‘ का गीत ‘मुझे किसी से प्यार हो गया, प्यार हो गया दिल बेक़रार हो गया’ सुनाया था। वाॅयस टेस्ट में उनकी आवाज़ उपयुक्त पाकर राज कपूर ने शारदा को शंकर जयकिशन के पास भिजवाया ताकि उन्हें उपयुक्त ट्रेनिंग मिल सके। उन्होंने उनसे अपनी फ़िल्म में गाने के अवसर देने का भी आश्वासन दिया।

शारदा का पहला गीत ‘तितली उड़ी‘ बेहद लोकप्रिय हुआ। उस समय तक फ़िल्मफ़ेयर एवार्ड में मेल -फ़ीमेल सिन्गर्स की अलग अलग कैटेगरी नहीं थी। उस वर्ष मोहम्मद रफ़ी को फ़िल्म ‘सूरज’ के गीत ‘बहारों फूल बरसाओ’ के लिये सर्वश्रेष्ठ गायक का एवार्ड दिया गया। शारदा को ‘तितली उड़ी’ के लिये स्पेशल एवार्ड मिला। उसके अगले वर्ष से महिला एवं पुरुष गायकों को अलग अलग एवार्ड देने का सिलसिला शुरु हुआ।

शारदा को शंकर जयकिशन की बड़ी बड़ी फ़िल्मों में गाने के अवसर मिलने लगे। अराउण्ड द वर्ल्ड, गुमनाम, सीमा, सपनों का सौदागर, प्यार मोहब्बत आदि सब फ़िल्मों में उनके गाने हिट हो रहे थे। उनकी यह सफलता स्थापित गायिकाओं को रास नहीं आई। उनके विरुद्ध एक अभियान सा छिड़ गया। प्रोड्यूसर्स पर दबाव डाल कर फ़िल्मों से गाने निकलवाये गये। फ़िल्म ‘दीवाना‘ में उनके गाये तीनों गीत काट दिये गये। दुकानों से उनके रिकार्ड्स हटवाये गये। प्रेस में उनके ख़िलाफ़ लिखा जाने लगा। संगीतकार शंकर और शारदा के सम्बंधों पर लतीफ़े बने -‘अभी तक सुनते थे कि प्यार अंधा होता है, अब पता चला कि प्यार बहरा भी होता है।’

यह सच है कि शारदा की गायन प्रतिभा सीमित थी पर यह भी सच है कि महिला गायिकाओं के एक परिवार की संगीत के क्षेत्र में मोनोपोली थी। किसी और गायिका के आगे बढ़ने के रास्ते में हमेशा रोड़े अटकाये जाते थे । कई प्रतिभासम्पन्न गायिकायें इस राजनीति का शिकार बनीं।

अपने वायदे के अनुसार राज कपूर ने फ़िल्म ‘ मेरा नाम जोकर ‘ के लिये तीन गीत शारदा के स्वर में रिकार्ड किये। बाद में वे तीनों गीत फ़िल्म में शामिल नहीं किये गये। बताया गया कि फ़िल्म की लम्बाई बहुत अधिक हो रही थी इस कारण ये गाने हटा दिये गये। पर्दे के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। आर के फ़िल्म्स की ‘कल आज और कल‘ के लिये रिकार्ड हुआ शारदा का गीत ‘किसी के दिल को सनम ले के यूँ नहीं नहीं जाते’ भी फ़िल्म से हटा दिया गया था।

‘मेरा नाम जोकर’ के लिये मुकेश और शारदा की आवाज़ में एक गीत रिकार्ड किया गया था जिसमें अभिनेत्री सिमी की आवाज़ और हँसी भी सुनाई देती है। नीरज लिखित यह गीत उन गीतों में एक है जो रिकार्ड तो किये गये पर फ़िल्म में नहीं रखे गये । इनके रिकार्ड्स भी रिलीज़ नहीं किये गये । ‘आज का गीत’ में प्रस्तुत है वह अनरिलीज़्ड गीत –

गाओ गाओ गाओ, झूम के गाओ
भूल दर्द ग़म , मुस्कुराओ
जो हँसा , वो यहाँ , आदमी
आदमी बन गया

थोड़ा सा ग़म , थोड़ी खुशी
ज़िन्दगी का नाम है
गा के कटे तो है सुबह
रो के कटे तो शाम है

कौन है तू , कौन हूँ मैं
याद न कर कुछ भी सनम
दो से अगर हम एक बने
तुम हो न तुम हम हैं न हम 

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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