गीत – हवा में उड़ता जाये मेरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
फ़िल्म – बरसात (1949)
संगीतकार – शंकर जयकिशन
गीतकार – डाॅ रमेश शास्त्री
गायिका – लता मंगेशकर

गीतकार शैलेन्द्र के जीवनकाल में शंकर जयकिशन की संगीतबद्ध ऐसी बेहद कम फ़िल्में हैं जिनमें शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी के अलावा अन्य गीतकार के लिखे गीत हों। ‘कालेज गर्ल‘ (1960, शम्मी कपूर, वैजयंतीमाला) शायद उस कालखंड की अकेली फ़िल्म है जिसमें शंकर जयकिशन के संगीत में सारे गाने राजेन्द्र कृष्ण के लिखे हुये हैं। कदाचित यह वह समय था जब शैलेन्द्र और शंकर जयकिशन के बीच कुछ ग़लतफ़हमियां आ गयीं थीं और शंकर जयकिशन उन्हें छोड़ कर अन्य गीतकारों के साथ काम करने लगे थे। तब शैलेन्द्र ने उन्हें लिख कर भिजवाया था -‘छोटी सी ये दुनिया है, कहीं तो मिलोगे तो पूछेंगे हाल।‘ ख़ुशक़िस्मती यह रही कि उनके सम्बंध सामान्य हो गये और वे पुनः साथ काम करने लगे। फ़िल्म ‘रंगोली‘(1962, किशोर कुमार, वैजयंतीमाला) में शैलेन्द्र ने फिर एक गीत लिख दिया -‘छोटी सी ये दुनिया, पहचाने रास्ते हैं, तुम कहीं तो मिलोगे, कभी तो मिलोगे तो पूछेंगे हाल।’

कुछ और गीत जो शंकर जयकिशन के लिये दूसरे गीतकारों ने लिखे याद आते हैं – ‘रात गयी फिर दिन आता है’ सरस्वती कुमार दीपक लिखित फ़िल्म ‘बूट पालिश’ (1954), भूपेन्द्र का गाया, कमलेश वर्मा का लिखा गीत -‘जगत में ना तेरा ना कोई मेरा’ फ़िल्म -‘रात और दिन‘ (1967)। मिर्ज़ा ग़ालिब की मशहूर ग़ज़ल फ़िल्म ‘मैं नशे में हूँ‘(1959) में शंकर जयकिशन ने सुरों में पिरोई थी -‘ये ना थी हमारी क़िस्मत कि विसाले यार होता'(उषा मंगेशकर)। फ़िल्म ‘अमन‘(1967) में प्रेम धवन का लिखा एक गीत था – ‘बर्बाद हिरोशिमा की तस्वीर देख लो (मोहम्मद रफी)। शैलेन्द्र की मृत्यु के बाद तो कई गीतकारों ने शंकर जयकिशन के लिये गीत लिखे जैसे – नीरज, बिट्ठलभाई पटेल, वर्मा मलिक, इन्दीवर, एम जी हशमत, विश्वेश्वर शर्मा आदि आदि।

बरसात‘ (1949) पहली फ़िल्म थी जिसमें शंकर जयकिशन, हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र साथ आये थे। फ़िल्म के टाइटिल्स/क्रेडिट्स में भी गीतकार के रूप में केवल दो नाम आते हैं – हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र। लेकिन इस फ़िल्म में दो गीत दो अन्य गीतकारों के लिखे हुये भी थे जिन्हें फ़िल्म की नामावली में स्थान नहीं मिला। ‘बरसात’ में जलाल मलीहाबादी का लिखा लता मंगेशकर का गाया एक गाना था -‘हो मुझे किसी से प्यार हो गया, प्यार हो गया दिल बेक़रार हो गया।’  एक अन्य गीत डाॅ रमेश शास्त्री का लिखा, लता मंगेशकर की आवाज़ में था जिसे पुष्पा बिमला नाम की अदाकारा पर फ़िल्माया गया था –

‘हवा में उड़ता जाये मेरा लाल दुपट्टा मलमल का, हो जी, हो जी’।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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