गीत – शीशा ए दिल इतना ना उछालो
ये कहीं फूट जायेगा ये कहीं टूट जायेगा
फ़िल्म – दिल अपना और प्रीत पराई (1960)
संगीतकार – शंकर जयकिशन
गीतकार – हसरत जयपुरी
गायिका – लता मंगेशकर

पचास के दशक में आल इण्डिया रेडियो/आकाशवाणी से फ़िल्मी गीत प्रसारित नहीं किये जाते थे। मुख्यत: इसका कारण तत्कालीन केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बी वी केसकर को माना जाता है। बी वी केसकर की दृष्टि में फ़िल्मी गीत छिछले और अश्लील हुआ करते थे जिनका बुरा असर युवावर्ग पर पड़ सकता था। अतएव उन्होंने आकाशवाणी से उन गीतों का प्रसारण अत्यन्त सीमित करवा दिया था। उस सीमित प्रसारण समय में गीतों के साथ फ़िल्म के नाम और अन्य सम्बंधित जानकारी की उद्घोषणा नहीं की जाती थी।

सत्यकाम : हृषिकेश मुखर्जी की वो फिल्म जिसे उन्होंने अपनी हर फिल्म में किश्तों में दिखाया

फ़िल्म प्रोड्यूसर्स गिल्ड अॉफ इंडिया को इस बात पर आपत्ति थी। उनकी माँग थी कि गानों के साथ फ़िल्म के नाम व अन्य जानकारियाँ भी एनाउन्स की जायें। इस तरह फ़िल्म का विज्ञापन भी हो जाता। उनकी माँग से सूचना एवं प्रसारण मंत्री सहमत नहीं थे। प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने निर्णय ले लिया कि वे इस सीमित समय के प्रसारण के लिये फ़िल्मी गीत नहीं देंगे । इस तरह आकाशवाणी से फ़िल्मी गीतों का प्रसारण पूर्णत: बन्द हो गया । प्रोड्यूसर्स व श्रोताओं के लिये रेडियो सीलोन का हिन्दी प्रसारण उपलब्ध था। वहाँ से फ़िल्मी गीत खुल कर प्रसारित किये जाते थे। रेडियो सीलोन की लोकप्रियता इस कारण शिखर पर थी।

पंडित नरेन्द्र शर्मा के प्रयत्नों से 3 अक्टूबर 1957, विजयदशमी के दिन से आकाशवाणी के पंचरंगी कार्यक्रम ‘विविध भारती’ का प्रसारण शुरू हुआ। सबसे पहले ख़ास इस अवसर के लिये पंडित नरेन्द्र शर्मा के लिखे, अनिल विश्वास के संगीतबद्ध किये और मन्ना डे के गाये गीत का प्रसारण हुआ –

नाच रे मयूरा
खोल कर सहस्त्र नयन
देख सघन गगन मगन
देख सरस स्वपन
जो कि आज हुआ पूरा

विविध भारती से फ़िल्मी गीतों का प्रसारण आरंभ हो गया। परन्तु आकाशवाणी के अधिकारियों की कड़ी नज़र में अगर किसी गीत में छिछलापन, सस्तापन या अश्लीलता पकड़ में आ जाती तो वह गीत बैन कर दिया जाता। उस गीत के रिकार्ड पर ‘नॉट एप्रूव्ह्ड’ का लेबल चिपका दिया जाता और वह गीत कभी नहीं बजाया जाता।

The Legend- Manna Dey

किशोर साहू निर्देशित फ़िल्म ‘दिल अपना और प्रीत पराई‘ ( 1960, मीना कुमारी, राज कुमार, नादिरा) शंकर जयकिशन के सुमधुर गीतों से सज्जित एक सफल फ़िल्म थी। उन दिनों 78 RPM रिकार्ड हुआ करते थे। इस फ़िल्म के एक रिकार्ड में एक तरफ़ ‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ गीत था तथा रिकार्ड के दूसरी तरफ़ ‘अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू कहाँ खतम’ गीत था। आकाशवाणी के एक अधिकारी को ‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ गीत आपत्तिजनक लगा। उसके अनुसार यह गीत प्रसारण योग्य नहीं था। उसने उस गीत पर ‘नॉट एप्रूव्ह्ड’ का लेबल लगाने का आदेश दे दिया। जिस क्लर्क को लेबल चिपकाना था उसने ग़लती से लेबल रिकार्ड के दूसरी तरफ़ ‘अजीब दास्ताँ है ये’ गीत पर चिपका कर उसे ‘नॉट एप्रूव्ह्ड’ कर दिया। क्लर्क की ग़लती से यह निर्दोष गीत आकाशवाणी पर बैन हो गया और ‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ बार बार उछल उछल कर बजता रहा।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

Comments