https://www.youtube.com/watch?v=PLmkj9mm9WE

गीत – अच्छे दिन आ रहे हैं,
बुरे दिन जा रहे हैं,
हुर्रा हुर्रा हुर्रा, हुर्रा
फ़िल्म – मिस्टर सम्पत ( 1952 )
संगीतकार – बी एस कल्ला एवं ई शंकर शास्त्री
गीतकार – पंडित इन्द्र
गायिकायें – शमशाद बेग़म, बसंत कुमारी

यह बात लगभग सब लोग जानते हैं कि जाने माने लेखक आर के नारायण (जो मशहूर कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण के भाई थे) के उपन्यास ‘दी गाइड‘ पर देव आनन्द की फ़िल्म ‘गाइड‘ आधारित थी। लेकिन यह बात कम ही लोगों को याद है कि उनकी एक अन्य कहानी पर पहले भी एक फ़िल्म बन चुकी थी। मद्रास (चेन्नई) की ‘जेमिनी पिक्चर्स‘ ने आर के नारायण की कहानी पर ‘मिस्टर सम्पत‘ नामक फ़िल्म बनाई थी। जेमिनी स्टुडियो के मालिक एस एस वासन इस फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक थे। जेमिनी का नाम ही दर्शकों के लिये अच्छी फ़िल्म होने की गारण्टी हुआ करता था। इस बैनर के अन्तर्गत् आई साफ़ सुथरी, मनोरंजन से भरपूर, पारिवारिक फ़िल्में हैं – चन्द्रलेखा, राजतिलक, इन्सानियत, पैग़ाम, घराना, गृहस्थी, ज़िन्दगी, तीन बहूरानियां, शतरंज आदि। एस एस वासन के मित्र तारा चन्द बड़जात्या ने अपनी फ़िल्म वितरण संस्था (राजश्री) का शुभारम्भ ‘चन्द्रलेखा’ के वितरण से किया था। इस फ़िल्म ने सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित किये थे।

‘मिस्टर सम्पत’ के प्रमुख कलाकार थे – मोतीलाल, पद्मिनी, आगा, कन्हैया लाल वग़ैरह। लगभग 65 वर्ष पहले बनी फ़िल्म का एक गीत आज भी पूर्ण रूप से प्रासंगिक है। इतने लम्बे अरसे में राजनैतिक परिदृश्य में कोई विशेष अन्तर नहीं आया है। पहले भी राजनेता अपने आश्वासनों से जनता को लुभा ले जाते थे। आज भी जनसाधारण इन लोकलुभावन वादों के झाँसे में आ जाता है। पंडित इन्द्र का लिखा यह गीत जिसे शमशाद बेग़म और बसंत कुमारी ने अपनी आवाज़ें दी हैं , लगता है आजकल का ही गीत है –

अच्छे दिन आ रहे हैं,  बुरे दिन जा रहे हैं, हुर्रा हुर्रा हुर्रा, हुर्रा।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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