दूरदर्शन पर धारावाहिक,”महाभारत” के पुनः प्रसारण होने से बहुत कुछ पुराना, स्मृतियों के रूप में वापस आया| बहुत से अभिनेता, जो विभिन्न चरित्रों के रूप में दिखे थे, इस धारावाहिक में, सब की खूब चर्चा हुई| सबसे ज़्यादा चर्चा हुई इस धारावाहिक के स्क्रिप्ट को लिखने वाले, महान साहित्यकार , डॉ० राही मासूम रज़ा साहब की, जो सच में भारत भूमि के सपूतों में गिने जाते हैं और जिनपर हम सब को हमेशा गर्व होना चाहिए|

लेकिन मनगढंत गंगा-जमुनी तहज़ीब के प्रचार के काल्पनिक उत्तरदायित्व जनित हड़बड़ाहट में हम उस महान लेखक को बिल्कुल भूल गए, जो उतना ही अधिकार रखता है प्रशंसा पर, जितना हम सब के चहेते, रज़ा साहब| उस शानदार लेखक का नाम पंडित नरेन्द्र शर्मा है| पंडित जी ने भी रज़ा साहब के साथ मिलकर महाभारत का पूरा स्क्रिप्ट लिखने में अपना पूरा कौशल और श्रम लगाया| लता मंगेशकर की आवाज़ में वह गीत, “सत्यम, शिवम्, सुन्दरम”, कौन भूल सकता है| इस गीत के सारे शब्द पंडित जी के ही थे, इससे उनके उच्च स्तर का पता, आसानी से चलता है|

जिस अनकहे कारण से कुछ अति उत्साही, सद्भावना के अधिवक्ता, पंडित जी का नाम लेना भूल गए या कई और जगहों पर कई और नाम भूल जाते हैं, वही कारण इनकी भावनाओं और कृत्यों को नाटकीय और भ्रामक बनाता है| भारत वैविध्य के साथ संस्कारों की भी भूमि है और हम सब को यह याद रखना चाहिए|

© विमलेन्दु

About the Writer 

Dr. Kumar Vimlendu Singh, a renowned scholar and author of bestsellers like “Mai Vidrohi, Mai Yayavar”, “To Whomsoever” and “Eve in Distress”. He has conducted around 700 workshops across India for the educators, on poetry, drama and story.

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