गीत – सारी सारी रात तेरी याद सताये
फ़िल्म – अजी बस शुक्रिया (1958)
संगीतकार – रोशन
गीतकार – फ़ारूक़ कैसर
गायिका – लता मंगेशकर

निर्माता एफ सी मेहरा ने ईगल फ़िल्म्स के झण्डे तले ‘अजी बस शुक्रिया’ (1958) का निर्माण किया था। गीताबाली, सुरेश, जानी वाकर, शम्मी, कुक्कू आदि इस फ़िल्म के प्रमुख कलाकार थे। उषा खन्ना फ़िल्मों में गायिका बनने का सपना ले कर आईं थीं। लेकिन उन्हें बड़ा ब्रेक संगीतकार के रूप में फ़िल्मालय की नासिर हुसैन निर्देशित फ़िल्म ‘दिल देके देखो‘ (1959, शम्मी कपूर, आशा पारेख) में मिला। उस फ़िल्म से पहले उषा खन्ना ने एक युगलगीत आशा भोंसले के साथ ‘अजी बस शुक्रिया’ में गाया था -‘धड़क धड़क दिल धड़के, हाँ जी, क्या प्यार का शोला भड़के, हाँ जी’
 
एक रोचक जानकारी यह कि इस गीत के गीतकार के रूप में भी उषा खन्ना का नाम दिया गया था। गीतकार के रूप में उषा खन्ना के अन्य गीत याद नहीं आते। संभवत: यह गीत उनके पिता मनोहर खन्ना/जावेद अनवर ने लिखा हो जिन्होंने नाम बदल बदल कर कई फ़िल्मों में गीत लिखे थे।
‘अजी बस शुक्रिया’ का सबसे लोकप्रिय गीत ‘सारी सारी रात तेरी याद सताये’ था। गीतकार फ़ारूक़ कैसर की मंगेतर उन दिनों गंभीर रूप से बीमार, अस्पताल में भर्ती थीं। वे लगभग एक वर्ष तक बीमार रहीं थीं। उस मानसिक परिस्थिति में फ़ारूक़ कैसर ने यह गीत क्या लिखा था मानो दिल का सारा दर्द गीत में उँडेल कर रख दिया था।
 
नसरीन मुन्नी कबीर को लता मंगेशकर ने बताया था कि महबूब स्टूडियो में जब संगीतकार रोशन ‘अजी बस शुक्रिया’ के इस गीत ‘सारी सारी रात तेरी याद सताये’ की रिकार्डिंग की तैयारी कर रहे थे उस समय नौशाद साहब वहाँ मिलने पहुंचे। नौशाद साहब के लिये सबके दिल में बड़ा सम्मान था। रोशन साहब ने उनसे अनुरोध किया कि वे उनका यह गीत रिकार्ड करवायें तो उनके लिये यह बड़े सम्मान और गर्व की बात होगी। नौशाद साहब के रोशन साहब से बड़े अच्छे सम्बन्ध थे अत: वे भी सहर्ष तैयार हो गये। लता मंगेशकर को नौशाद ने कुछ सुझाव दिये। हालाँकि उन्होंने गीत की मूल धुन में कोई परिवर्तन नहीं किया और रोशन साहब का यह प्रसिद्ध गीत नौशाद साहब के मार्ग निर्देशन में रिकार्ड कराया गया।
साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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