गीत – मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के
फ़िल्म – श्री 420 (1955)
संगीतकार – शंकर जयकिशन
गीतकार – शैलेन्द्र
गायक – आशा भोंसले, मन्ना डे

महबूब खान साहब की महत्वाकांक्षी फ़िल्म ‘आन‘ अपने आरंभिक स्वरूप में एक ‘तीन हीरोइन वाला प्रोजेक्ट‘ थी – नर्गिस, निम्मी और नई अदाकारा नादिरा। तीनों का एक साथ एक विज्ञापन भी प्रकाशित हुआ था। नर्गिस उसमें एक नकचढ़ी, बिगड़ैल स्वभाव वाली राजकुमारी की भूमिका निभाने वाली थीं। उन दिनों नर्गिस का ज़्यादा समय और ध्यान आर के फ़िल्म्स के प्रति रहता था। उन्होंने कुछ सोच समझ कर ‘आन’ फ़िल्म न करने का निर्णय ले लिया। नर्गिस के इंकार करने से महबूब खान साहब ने कहानी में थोड़ा परिवर्तन कर नादिरा जो रोल करने वाली थीं, वह ख़त्म कर दिया और नर्गिस जो उद्दंड राजकुमारी का चरित्र करने वाली थीं वह नादिरा को दे दिया। इस तरह नादिरा उस फ़िल्म की मुख्य नायिका बन गयीं। ‘आन’ पहली टेक्नीकलर फ़िल्म थी। उन दिनों कलर्ड फ़िल्म्स की प्रोसेसिंग भारत में नहीं होती थी।

An Interview- Nimmi

प्रोसेसिंग के बाद ही पता चलता कि प्रिण्ट्स कैसे आये थे। महबूब साहब ने 16 एम एम में कलर में ‘आन’ को शूट किया। साथ ही दूसरे कैमरे से ब्लैक एण्ड व्हाइट में भी फ़िल्म शूट की जाती रही। सावधानीवश यह किया जा रहा था कि अगर कलर्ड फ़िल्म डेवेलपिंग के बाद सही नहीं आई तो ब्लैक एण्ड व्हाइट ‘आन’ रिलीज़ कर दी जायेगी। 16 mm फ़िल्म को लन्दन में 35 mm में ब्लो किया गया तथा टेक्नीकलर डेवेलपिंग / प्रोसेसिंग भी लन्दन में की गयी। वह प्रयोग सफल रहा। महबूब साहब ने बड़े धूमधाम से फ़िल्म का प्रीमियर लन्दन में किया।

नादिरा का इस तरह फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण एक भव्य तरीक़े से हुआ। फिर उन्होंने हर तरह के रोल करने की चाह में राज कपूर की ‘श्री 420’ में वैम्प की भूमिका स्वीकार कर ली। उन्होंने वह भूमिका इतने प्रभावशाली ढंग से अदा की कि उन पर सदा के लिये खलनायिका का ठप्पा लग गया।

The Great- Raj Kapoor

फ़िल्म ‘देवदास’ में चन्द्रमुखी की भूमिका के लिये वैजयंतीमाला को सर्वश्रेष्ठ सहनायिका के फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड हेतु चुना गया था। लेकिन वैजयंतीमाला ने यह कह कर वह अवार्ड ठुकरा दिया कि ‘देवदास‘ में पारो और चन्द्रमुखी दोनों ही नायिकायें हैं, वे सहनायिका का अवार्ड नहीं लेंगी। उसके बाद फ़िल्मफ़ेयर वालों ने यह अवार्ड नादिरा को ‘श्री 420’ के लिये देने का प्रस्ताव किया जिसे नादिरा ने अस्वीकार कर दिया। उन परिस्थितियों में वह अवार्ड लेना उन्हें सही नहीं लगा। कई बरस बाद उन्हें फिर ‘जूली’ (1975) के लिये सर्वश्रेष्ठ सहनायिका का फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड मिला।

‘श्री 420’ में ‘मुड़ मुड़ के ना देख’ गीत में नादिरा का ग्लैमरस अवतार दर्शकों के दिलोदिमाग़ में इतने बरसों बाद आज भी ताज़ा है। इस गीत में ग्रुप डांसर के रूप में अभिनेत्री साधना ने पहली बार कैमरा फ़ेस किया था  (0:42 ) तथा गीत के अंतिम हिस्से में परदे पर संगीतकार जयकिशन भी नज़र आ जाते हैं (5:08)।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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