गीत – मेरा रंग दे बसंती चोला
फ़िल्म – शहीद (1965)
संगीतकार – प्रेम धवन
गायक – मुकेश, महेन्द्र कपूर, राजेन्द्र मेहता

गीतकार प्रेम धवन को फ़िल्म ‘परदेसी‘ (1957, नर्गिस, रूसी हीरो ओलिग, बलराज साहनी, पद्मिनी) की शूटिंग के दौरान लम्बे समय तक रूस में रहना पड़ा था। ‘परदेसी’ रूसी तथा भारतीय कलाकारों तथा टेक्नीशियनों के सहयोग से बन रही थी (इण्डो रशियन कोप्रोडक्शन)। स्वदेश से दूर रह कर उन्हें वहाँ अपना वतन बहुत याद आया। उन्होंने अपनी भावनाओं को गीत में यूँ व्यक्त किया -‘अय मेरे प्यारे वतन, अय मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल क़ुर्बान‘। बिमल राय ने बाद में उस गीत को ‘काबुलीवाला‘ में शामिल कर लिया था। मनोज कुमार को ‘शहीद‘ बनाने की प्रेरणा इस गीत से ही मिली थी। निर्माता केवल पी कश्यप के अनुरोध पर उन्होंने ‘शहीद’ की कहानी लिखी थी। इसके लिये लगभग चार साल तक उन्होंने सामग्री जुटाई। अपनी रिसर्च के दौरान वे विभिन्न अख़बारों के दफ़्तर गये। पुरानी पत्रिकाओं और पुस्तकों से तथ्य एकत्रित किये। कई क्रान्तिकारियों, शहीद भगत सिंह की माँ एवं उनके वक़ील से मिले।

बात उस नायक की : बलराज साहनी

आधिकारिक रूप से फ़िल्म में निर्देशक के रूप में एस राम शर्मा का नाम आता है पर असल में उसका निर्देशन मनोज कुमार ने किया था। इस फ़िल्म ने मनोज कुमार की छवि रोमांटिक हीरो से बदल कर ‘भारत कुमार’ की कर दी। फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फ़ीचर फ़िल्म तथा राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। मनोज कुमार के पिता चण्डीगढ़ जाकर भगत सिंह की माँ विद्यावती जी को पुरस्कार समारोह के लिये दिल्ली ले कर आये। विद्यावती जी के मंच पर आने पर दर्शकों ने खड़े हो कर पन्द्रह मिनट तक तालियाँ बजाईं। इन्दिरा गांधी जी ने विद्यावती जी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। केवल पी कश्यप और मनोज कुमार ने पुरस्कार की प्राइज़ मनी विद्यावती जी को भेंट कर दी।

‘शहीद’ में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की भूमिकायें मनोज कुमार, प्रेम चोपड़ा और अनन्त पुरुषोत्तम मराठे ने निभाई थी। पूरी फ़िल्म में तीनों ने मेकअप नहीं किया था। केवल अंतिम दृश्य में जब उन्हें फाँसी के तख्ते पर ले जाया जा रहा था, मेकअप किया ताकि मौत के सामने भी उनके चेहरों पर चमक दिखलाई पड़े। इन शहीदों को फाँसी लाहौर जेल में हुई थी। उससे मिलते जुलते लुधियाना जेल में उस दृश्य की शूटिंग हुई। हिन्दी फ़िल्मों में पहली बार फ़्रीज़्ड शाट्स का प्रयोग इस फाँसी के दृश्य में किया गया था। क्लाइमेक्स के इन दृश्यों में दो गीतों के अंशों का इस्तेमाल किया गया – ‘अय वतन अय वतन हमको तेरी कसम’ तथा ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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