गीत – ये हसीं रात तो मंसूब तेरे नाम से है
फ़िल्म – मजनून (अप्रदर्शित, 1979)
संगीतकार – ख़य्याम
गायक – लता मंगेशकर, यसुदास

कमाल अमरोही ने अपने जीवनकाल में कुल चार फ़िल्मों का निर्देशन किया था – महल (1949), दायरा (1953), पाकीज़ा (1972) और रज़िया सुल्तान (1983)। उन्होंने चार शादियाँ भी की थी। मीनाकुमारी उनकी तीसरे नम्बर की बेग़म थीं। इन फ़िल्मों के अलावा उन्होंने कुछ और फ़िल्में बनाने का इरादा किया था। ‘अनारकली’ वे मीनाकुमारी को नायिका ले कर बनाना चाह रहे थे। फिर इस विषय पर बनी ‘मुग़लेआज़म’ में उन्होंने संवाद लेखन किया।

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1979 में कमाल अमरोही ने फ़िल्म ‘ मजनून ‘ का एक भव्य मुहूर्त किया था। एक विशाल मोमबत्ती का सेट लगाया गया था जिस पर बेहिसाब पैसा ख़र्च किया गया। मुहूर्त शाट राजेश खन्ना और राखी पर बड़े धूमधाम से फ़िल्माया गया था। फ़िल्म में राजकपूर और प्रदीप कुमार जैसे कलाकारों के भी काम करने की चर्चा रही थी। यह फ़िल्म बाज़बहादुर और रानी रूपमती की प्रेमकहानी पर आधारित थी। संगीतकार ख़य्याम ने फ़िल्म के लिये दो गीत रिकार्ड किये थे। एक गीत का फ़िल्मांकन फ़िल्म के प्रमुख सितारों पर किया गया। कमाल अमरोही बेहद आराम आराम से आहिस्ता आहिस्ता काम करने वाले माने जाते थे। फ़िल्म के मुहूर्त तक स्क्रीनप्ले लेखन का काम पूरा नहीं हुआ था। बाद में भी उसमें कोई प्रगति होती नहीं दिखाई दे रही थी। आधिकारिक रूप से फ़िल्म ‘मजनून’ के प्रोड्यूसर डिम्पल कपाड़िया के पिता चुन्नीभाई कपाड़िया थे। पर माना जा रहा था कि दरअसल पैसा राजेश खन्ना लगा रहे थे। लम्बे समय तक जब फ़िल्म की कोई प्रगति होती नहीं दिखाई दी तो राजेश खन्ना और चुन्नीभाई कपाड़िया को इस फ़िल्म में और पैसा ना लगाना ही समझदारी की बात लगी। फ़िल्म अधूरी छोड़ दी गयी।

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‘मजनून’ के एक गीत ‘ये हसीं रात तो मंसूब तेरे नाम से है’ की असम्पादित क्लिपिंग प्रस्तुत है। इसकी अाडियो क्वालिटी काफ़ी कमज़ोर है। आवाज़ अस्पष्ट सी है। पर इस वीडियो का अपना एक महत्व है। इस फ़िल्म के डिब्बाबन्द हो जाने के बाद संगीतकार ख़य्याम ने इस धुन को परिमार्जित कर फ़िल्म ‘बावरी‘ (1981, राकेश रोशन, जयाप्रदा) में इस्तेमाल कर लिया – ‘अब चराग़ों का कोई काम नहीं, तेरे नैनों से रोशनी सी है’ (गीतकार – माया गोविन्द)। ‘ मजनून ‘ और ‘ बावरी ‘ दोनों ही फ़िल्मों के गीत लता मंगेशकर और यसुदास की आवाज़ों में हैं।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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