गीत – मेरी छोटी सी बहन देखो गहने पहन
ससुराल चली रे बनठन के
फ़िल्म – तूफ़ान और दिया (1956)
संगीतकार – वसंत देसाई
गीतकार – भरत व्यास
गायिकायें – गीता राय (दत्त), लता मंगेशकर

अभिनेत्री नन्दा की आरंभिक फ़िल्मों से उनकी छवि एक बहन की बन गई थी जो लम्बे अरसे तक उनसे जुड़ी रही। अपने पिता मास्टर विनायक, जो स्वयं एक कुशल अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे, की मृत्यु के पश्चात् उन्हें फ़िल्मों में काम करना पड़ा। पहले उन्होंने बेबी नन्दा के नाम से बाल भूमिकायें निभाईं। वयस्क होने पर उनके चाचा व्ही शांताराम ने उन्हें नायिका बना कर फ़िल्म ‘तूफ़ान और दिया’ (1956) में प्रस्तुत किया। यह फ़िल्म मूलतः भाई बहन की कहानी थी जिसमें नन्दा, सतीश व्यास की बहन बनी थीं। उन दोनों पर भाई बहन की चुहुलबाज़ी से भरा एक प्यारा गीत फ़िल्माया गया था – ‘मेरी छोटी सी बहन देखो गहने पहन, ससुराल चली रे बनठन के’।

1959 में आई दो फ़िल्म ‘बरखा‘ और ‘छोटी बहन’ ने उनकी बहन वाली इमेज को और पुख़्ता कर दिया। ‘बरखा’ में जगदीप की बहन बन कर, उन दोनों ने एक मज़ेदार गीत पर्दे पर गाया था – ‘वो दूर जो नदिया बहती है वहाँ इक अलबेली रहती है, सुन भैया वही मेरी भाभी है, गोरा मुखड़ा है गाल गुलाबी है’।

प्रसाद प्रोडक्शन्स की फ़िल्म ‘छोटी बहन’ का टाइटिल रोल नन्दा ने किया था। वे इसमें बलराज साहनी और रहमान की छोटी बहन बनी थीं। शंकर जयकिशन के संगीत में बँधा शैलेन्द्र का कालजयी गीत उन पर फ़िल्माया गया था -‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’। तब से आज तक कोई राखी ऐसी नहीं गई जब राखी के दिन रेडियो पर यह गीत बार बार न बजाया गया हो। भविष्य में भी यह परम्परा जारी रहेगी।

नन्दा के पास जो प्रशंसकों के पत्र आते थे उसमें से अधिकांशतः उन्हें छोटी बहन कह कर सम्बोधित करते थे। एक वर्ष राखी के अवसर पर नन्दा ने अपने प्रशंसकों के पत्रों के जवाब में अपने हस्ताक्षरित फ़ोटोग्राफ़्स के साथ एक एक राखी भी रख दी। कुछ ही दिनों में उनके घर मनीआर्डर आने का सिलसिला शुरू हो गया। भारतीय परम्परा के अनुसार राखी पा कर हर प्रशंसक ने अपने सामर्थ्य के हिसाब से बहन नन्दा को राखी के नेग हेतु मनीआर्डर भेजा था। पहले नन्दा ने मनीआर्डर लौटा देने पर विचार किया। फिर उनके परिवार वालों ने समझाया कि इससे उनके प्रशंसकों की भावनायें आहत हो सकती हैं। उन्होंने उन राखी के रुपयों से एक घड़ी ख़रीद ली ताकि उनकी कलाई में बंधी वह घड़ी उन्हें हमेशा प्रशंसकों के स्नेह की याद दिलाती रहे और वे सदैव सब काम समय पर करती रहें।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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