गीत – मेरे सामने वाली खिड़की में एक चाँद का टुकड़ा रहता है
फ़िल्म – पड़ोसन (1968)
संगीतकार – राहुलदेव बर्मन
गीतकार – राजेन्द्र कृष्ण
गायक – किशोर कुमार

पड़ोसन‘ एक क्लासिक हास्य फ़िल्म का दर्जा प्राप्त कर चुकी है। इसमें सुनील दत्त को गाना नहीं आता है मगर वे नायिका सायरा बानो को रिझाने के लिये मुँह हिलाते हैं और पीछे से गाना किशोर कुमार गाते हैं। ‘मेरे सामने वाली खिड़की में एक चाँद का टुकड़ा रहता है’, ‘एक चतुर नार करके सिंगार’ और ‘कहना है कहना है आज तुमसे ये पहली बार’ ये सारे गीत इसी तरह आगे सुनीलदत्त और पीछे किशोर कुमार पर गाते हुये फ़िल्माये गये हैं।

Kishore Kumar Live In Filmfare Night

फ़िल्म -‘प्यार किये जा‘ (1966) में किशोर कुमार नायक थे लेकिन उस फ़िल्म में काम करने के लिये उनसे ज़्यादा पारश्रमिक महमूद ने लिया था। यह बात किशोर कुमार को अखर गयी थी। जब ‘पड़ोसन’ के लिये महमूद उन्हें साइन करने गये तो उन्होंने उन्हें ख़ूब सताया और एक बड़ी सी राशि की माँग उनके सामने रख दी। महमूद जानते थे कि यह भूमिका किशोर कुमार के अलावा और कोई नहीं कर सकता है। उन्हें उनकी सारी शर्तें माननी पड़ीं।

सामने एक कलाकार का ‘लिप मूवमेण्ट’ देना और पीछे से दूसरे का गाना – इस तरह की सिचुएशन का पहले भी कुछ फ़िल्मों में उपयोग किया जा चुका था। व्ही शांताराम निर्देशित फ़िल्म ‘आदमी‘( 1939, प्रभात पिक्चर्स) में एक महिला सामने मुँह हिलाते हुये हावभाव प्रगट करती है और पर्दे के पीछे से एक किशोर बालक गाना गाता है – ‘बरजोरी करके सैंया ने बैंया मरोरी मोरी’। इस गीत के गायक राम मराठे और संगीतकार मास्टर कृष्णाराव थे।

हम सब चोर हैं‘ (1956) में नायक शम्मी कपूर, नलिनी जयवंत को प्रभावित करने के लिये गाने का अभिनय करते हैं और पीछे से उनके दोस्त हास्य कलाकार राम अवतार गीत गाते हैं –
तेरे आगे बोलना दुश्वार हो गया
हाय मुझे पे पे पे पे प्यार हो गया
(मोहम्मद रफी, ओ पी नय्यर, मजरूह सुल्तानपुरी)

Shammi Kapoor – In Perpetual Motion

किशोर कुमार को पहले स्टेज पर दर्शकों के सामने गाने में बड़ा संकोच होता था । एक बार सुनील दत्त के अजन्ता आर्ट्स के ग्रुप के साथ फ़ौज के जवानों का मनोरंजन करने किशोर कुमार भी साथ गये थे । लेकिन वे किसी भी तरह मंच पर आ कर गाने के लिये तैयार नहीं हो रहे थे । सुनीलदत्त ने उन्हें सलाह दी कि मैं डमी माइक ले कर स्टेज पर मुँह हिलाता रहूँगा और पर्दे के पीछे से आप ‘मेरे सामने वाली खिड़की में’ गाते रहना।

फ़िल्म की सिचुएशन याद कर सबको मज़ा आयेगा। किशोर कुमार तैयार हो गये। वे पर्दे के पीछे आँख बंद कर पूरी तन्मयता से गा रहे थे। सामने सुनीलदत्त मुँह हिला रहे थे। धीरे से सुनीलदत्त स्टेज से हट गये। उन्होंने इशारे से पर्दा भी हटवा दिया। किशोर आँखें बंद कर मगन गाते रहे। गाना ख़त्म होने पर जब ज़ोरों की तालियाँ बजीं तो उन्होंने आँखें खोलीं और सुनीलदत्त को घूर कर देखा। मगर तालियों की गड़गड़ाहट और मिलती वाहवाही ने उनका संकोच समाप्त कर दिया। उसके बाद तो उन्होंने कई सफल स्टेज प्रोग्राम दिये।

A Rare Photo Album Collection Of Saira Banu

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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