गीत – मेरा सुन्दर सपना बीत गया
मैं प्रेम में सब कुछ हार गयी
बेदर्द ज़माना जीत गया
फ़िल्म – दो भाई (1947)
संगीतकार – एस डी बर्मन
गीतकार – राजा मेंहदी अली खान
गायिका – गीता राय/दत्त

कामिनी कौशल का असली नाम उमा कश्यप था। जब चेतन आनन्द ने पहली बार उन्हें फ़िल्म – ‘नीचा नगर‘ (1946) में हीरोइन बनाया तो उनका नाम कामिनी कौशल रख दिया। चेतन आनन्द की पत्नी का नाम भी ‘उमा’ था इस कारण वे नाम बदलना चाह रहे थे। कामिनी कौशल के साथ साथ ‘नीचा नगर’ ज़ोहरा सहगल की पहली फ़िल्म थी। पंडित रवि शंकर भी पहली बार किसी फ़िल्म में संगीत दे रहे थे। संयोग यह रहा कि कामिनी कौशल की नायिका के रूप में अंतिम फ़िल्म ‘गोदान‘ (1963) में भी पंडित रवि शंकर का संगीत था। कामिनी कौशल ‘शहीद‘ (1965) से चरित्र भूमिकायें करने लगी थीं।

Ravi Shankar- An Enduring Legacy

टाइम्स आॅफ इंडिया प्रकाशन समूह ने साठ के दशक में बच्चों की एक मासिक पत्रिका ‘पराग‘ का प्रकाशन शुरू किया था। इसका पहला अंक जब टाइम्स समूह के साहू शांति प्रसाद जैन ने कामिनी कौशल को दिखाया तो उसे उलट पलट कर देखने के बाद उनकी प्रतिक्रिया थी,’अरे ये बच्चों की पत्रिका तो लग ही नहीं रही।‘ उन्होंने उसमें कई कमियाँ गिना दीं कि इसमें ये नहीं है, इसमें वो नहीं है। जैन साहब ने तत्काल उनके सामने प्रस्ताव रख दिया कि आप क्यों नहीं ‘परा ‘ से जुड़ जातीं और बच्चों के लायक उपयुक्त सामग्री पेश करतीं। थोड़ी हिचक के बाद कामिनी कौशल ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। वे ‘पराग’ में बच्चों की कामिनी दीदी के नाम से ‘चाटपानी‘ स्तंभ लिखने लगीं। वे बच्चों के लिये कहानियाँ लिखतीं, हर महीने उन्हें पत्र लिखतीं। उन्होंने अपने बच्चों पर आधारित चरित्र – कुमकुम, बुलबुल, बण्टी आदि के रोचक क़िस्से बच्चों को सुनाना शुरू किया। एक बंदरिया ‘नन्हीं‘ भी उन चरित्रों के साथ शामिल हो गयी। कामिनी दीदी के सहयोग से ‘पराग’ की लोकप्रियता में बहुत बढ़ोतरी हुयी थी। उन्होंने एक बार बम्बई में ‘पराग बाल मेला’ का आयोजन किया था जिसमें देश भर के हज़ारों बच्चों ने भाग लिया था।

Blast From Past: Raja Mehdi Ali Khan

कामिनी कौशल को कठपुतलियाँ बनाने का बड़ा शौक़ है। दूरदर्शन के लिये उन्होंने ‘पपेट शो‘ पर बालकथाओं पर आधारित बड़े प्यारे कार्यक्रम बनाये थे। फ़िल्मिस्तान की फ़िल्म ‘दो भाई‘ (1947, उल्हास, कामिनी कौशल, राजन हक्सर) सचिन देव बर्मन साहब के मधुर संगीत के लिये याद की जाती है। इसमें गीता राय/दत्त के गाये दो गीतों ने बर्मन दा और गीता जी दोनों की लोकप्रियता को शिखर पर पहुँचा दिया था – ‘याद करोगे याद करोगे, इक दिन हमको याद करोगे’ तथा ‘मेरा सुन्दर सपना बीत गया’। ये गीत कामिनी कौशल पर फ़िल्माये गये थे। ‘मेरा सुन्दर सपना बीत गया’ गीत की विशेषता यह है कि यह पूरा गीत ‘सिंगल टेक’ में फ़िल्मा लिया गया था।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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