संगीतकार जोड़ी सोनिक ओमी के ओमी जी आज 7 जुलाई की सुबह इस असार संसार को बिदा कह गये। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

सोनिक – ओमी की जोड़ी चाचा भतीजा की जोड़ी थी। ‘सोनिक’ उन दोनों का सरनेम था। चाचा सोनिक का पूरा नाम मनोहर लाल सोनिक तथा भतीजे ओमी का ओम प्रकाश सोनिक था। दोनों के बीच लगभग 17- 18 वर्ष का अंतर था। सोनिक जी की आँखों की रोशनी बचपन में ही जाती रही थी। अत: जब वे संगीत की दुनिया में क़िस्मत आज़माने बम्बई आये तो उनकी मदद के लिये ओमी साथ चले आये।

सोनिक ने कुछ फ़िल्मों में गायन किया और अन्य संगीतकारों के साथ मिल कर संगीत निर्देशन भी किया – जैसे ‘ईश्वर भक्ति‘ (1951) में संगीतकार गिरधर के साथ तथा ‘ममता‘( 1952 ) में हंसराज बहल के साथ। फिर वे म्यूज़िक अरेंजर बन गये। मदन मोहन, उषा खन्ना, रोशन आदि संगीतकारों के साथ उन्होंने अरेंजर का काम किया। ओमी भी उनके साथ संगीत की दुनिया में आ गये थे।

रावल फ़िल्म्स की ‘दिल ही तो है‘ (राजकपूर, नूतन) में पहली बार रोशन साहब के सहायक के रूप में सोनिक ओमी का नाम पर्दे पर आया। उनके काम से प्रभावित हो कर निर्देशक सी एल रावल ने रावल फ़िल्म्स की अगली फ़िल्म ‘दिल ने फिर याद किया‘ में स्वतंत्र संगीतकार के रूप में इस जोड़ी को ब्रेक दिया। अपनी पहली फ़िल्म में ही इन्होंने सुमधुर गीतों की झड़ी लगा दी – दिल ने फिर याद किया बर्क़ सी लहराई है, कलियों ने घूँघट खोले, ये दिल है मोहब्बत का प्यासा, लो चेहरा सुर्ख़ शराब हुआ, मैं सूरज हूँ तू मेरी किरण आदि आदि।

उनके संगीत से सजी प्रमुख फ़िल्में हैं – आबरू, सावन भादों, धर्मा, रफ़्तार, उमरकैद वग़ैरह। फिर वे ‘बी ग्रेड ‘ फ़िल्मों के भंवरजाल में फँस गये। ओमी एक गायक भी थे। कई फ़िल्मों में उन्होंने गीत गाये लेकिन उनकी संगीतकार वाली छवि ही ज़्यादा पहचानी गयी। चाचा सोनिक का देहान्त 1993 में हो गया था और अब भतीजे ओमी भी चले गये।
संगीत प्रेमियों के दिल उन्हें हमेशा याद करते रहेंगे।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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