गीत – तुम्हें हुस्न देके ख़ुदा ने सितमगर बनाया
चलो इस बहाने तुम्हें भी ख़ुदा याद आया
फ़िल्म – जब से तुम्हें देखा है (1963)
संगीतकार – दत्ताराम
गीतकार – आनन्द बख्शी
गायक – मो रफी , मन्ना डे , लता मंगेशकर, आशा भोंसले

साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखक राजेन्द्र सिंह बेदी के चर्चित उपन्यास ‘एक चादर मैली सी‘ पर 1986 में एक फ़िल्म बनी थी जिसमें मुख्य भूमिकाओं में हेमा मालिनी , ऋषि कपूर, पूनम ढिल्लन, कुलभूषण खरबंदा थे। इसके लगभग दो दशक पूर्व इस उपन्यास पर गीता बाली एक पंजाबी फ़िल्म बना रहीं थीं। उपन्यास की नायिका के नाम पर फ़िल्म का नाम ‘रानो‘ था। गीता बाली उन दिनों पूरी तरह इस चरित्र में डूब गयीं थीं। राजेन्द्र सिंह बेदी को उन्होंने उन दिनों जो ग्रीटिंग कार्ड भेजा था उसमें नीचे दस्तखत ‘रानो’ किये थे। फ़िल्म के संवाद स्वयं राजेन्द्र सिंह बेदी लिख रहे थे। लोगों के द्वारा लगातार डिस्टर्ब किये जाने के कारण जब उन्हें काम करने में दिक़्क़त आने लगी तो गीताबाली ने उन्हें एक मंहगे अस्पताल के प्राइवेट रूम में भर्ती करा दिया ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपना काम पूरा कर सकें।

गीताबाली के साथ ‘रानो’ के नायक धर्मेन्द्र थे । वे दोनों ही पंजाब के थे और इस फ़िल्म में अपने प्रदेश पंजाब की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करना चाह रहे थे। निर्देशक सी एल धीर और गीताबाली ने फ़िल्म की शूटिंग के लिये बड़ी खोजबीन के बाद जालंधर ज़िले के एक क़स्बे ‘बंगा’ को चुना था। यहाँ के घर, गली, मोहल्ला, बाज़ार सब कहानी के सही परिवेश को दिखाने के लिये सर्वथा उपयुक्त थे। ‘रानो’ की आउटडोर शूटिंग में यहाँ गीताबाली पूरी तरह डूबी हुईं थीं तब ही उनकी तबीयत ख़राब रहने लगी और उन्हें मजबूरन बम्बई वापस लौटना पड़ा। उन्हें चेचक हो गया था जिसके चलते अन्ततः असमय उनकी मृत्यु हो गई। ‘रानो’ का सपना अधूरा रह गया।

गीताबाली की अंतिम प्रदर्शित फ़िल्म – ‘जब से तुम्हें देखा है‘ ( 1963 ) थी। प्रदीप कुमार इस फ़िल्म के नायक थे। फ़िल्म की एक क़व्वाली में गीताबाली के कारण उनके पति शम्मी कपूर और देवर शशि कपूर मेहमान कलाकार के रूप में आने के लिये तैयार हो गये। यह संभवत: एकमात्र फ़िल्म है जिसमें दोनों भाई पर्दे पर एक साथ नज़र आते हैं। उनके अलावा श्यामा, कुमकुम, ओमप्रकाश, भगवान दादा भी क़व्वाली में नाचते गाते दिखलाई पड़ते हैं। गीताबाली और प्रदीप कुमार भी कुछ क्षणों के लिये सामने आते हैं । वैसे तो फ़िल्म के बाक़ी सभी गीत गीतकार शैलेन्द्र ने लिखे थे लेकिन इस क़व्वाली को शब्द दिये आनन्द बख़्शी ने – तुम्हें हुस्न दे के ख़ुदा ने सितमगर बनाया

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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