गीत – कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा,
हम किसी के न रहे , कोई हमारा न रहा
फ़िल्म – झुमरू (1961)
संगीतकार – किशोर कुमार
गीतकार – मजरूह सुल्तानपुरी
गायक – किशोर कुमार

अशोक कुमार अपने सबसे छोटे भाई किशोर कुमार से लगभग सत्रह साल बड़े थे। अशोक कुमार के कारण ही किशोर फ़िल्मों में आये। उनकी इच्छा एक गायक बनने की थी। फ़िल्म -‘झूला‘(1941) में अशोक कुमार ने एक गीत गाया था -‘एक चतुर नार कर कर सिंगार, ठांड़े अपने द्वार।‘ इस गीत को कवि प्रदीप ने लिखा था और सरस्वती देवी ने संगीतबद्ध किया था। किशोर कुमार को यह गीत बहुत पसंद था। ‘पड़ोसन‘ के समय उनके सुझाव पर राजेन्द्र कृष्ण ने उस गीत को परिमार्जित कर नया रूप दिया और मन्ना डे व किशोर कुमार ने आर डी बर्मन की धुन पर हंगामाखेज़ ढंग से गाया।

Ashok Kumar: A Legend Par Excellence

अशोक कुमार का एक और फ़िल्म ‘जीवन नैया‘ (1936) का गीत किशोर कुमार को बेहद अच्छा लगता था जिसके गीतकार जे एस कश्यप थे। भारतीय फ़िल्मों की पहली महिला संगीतकार सरस्वती देवी ने उसे धुन में बाँधा था -‘कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा।’

उस समय किशोर कुमार पाँच साल के थे और वह गीत गाने की कोशिश करते थे। अशोक कुमार के अनुसार किशोर कुमार का गला बचपन में बहुत ख़राब था। एक बार उन्हें एक गहरा घाव हो गया जिसके दर्द के कारणों लगभग एक महीने तक चिल्ला चिल्ला कर रोते रहे। जिस तरह रियाज़ करने से गला साफ़ हो जाता है उसी तरह रोने से एक महीने में घाव भी साफ़ हो गया और गला भी साफ़ हो गया।

Blast From Past: Saraswati Devi

पच्चीस साल बाद किशोर कुमार जब ‘झुमरू‘ (1961) बना रहे थे तब उन्होंने अशोक कुमार से कहा कि दादा मैं आपका वह ‘जीवन नैया’ वाला गीत गाना चाहता हूँ – ‘कोई हमदम न रहा।’ अशोक कुमार ने कहा कि वह तुमसे नहीं बन पायेगा । वह चौदह मात्रा का है। उन्होंने और भी उसके शास्त्रीय पक्ष को समझाया। पर किशोर कुमार ने कहा, ‘मैं चौदह मात्रा वात्रा कुछ नहीं जानता। लेकिन मैं वह गीत गाऊँगा और देखना आप से अच्छा गाऊँगा।’ मजरूह सुल्तानपुरी ने गीत को नया रूप और विस्तार दिया और उसकी धुन ख़ुद किशोर कुमार ने बनाई और वाक़ई अशोक कुमार से अच्छा गाया।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

फ़िल्म – जीवन नैया ( 1936 )
गायक – अशोक कुमार
गीत – कोई हमदम न रहा , कोई सहारा न रहा

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