गीत – यारों सूरत हमारी पे मत जाओ
यहाँ भी दिल है यूँ हमसे ना कतराओ
फ़िल्म – उजाला (1959)
संगीतकार – शंकर जयकिशन
गीतकार – शैलेंद्र
गायक – मोहम्मद रफ़ी, मुकेश

निर्माता एफ सी मेहरा (फ़क़ीर चंद मेहरा) के बैनर ईगल फ़िल्म्स के अंतर्गत शम्मी कपूर ने कई चर्चित फ़िल्मों में नायक की भूमिकायें निभाई थीं – उजाला (1959), सिंगापुर (1960), प्रोफ़ेसर (1962), प्रिंस (1969) आदि। इन सभी फ़िल्मों के संगीतकार शंकर जयकिशन थे। ‘उजाला’ में शम्मी कपूर के साथ राज कुमार, माला सिन्हा, कुमकुम प्रमुख भूमिकाओं में थे। शंकर जयकिशन ने फ़िल्म के लिये बड़े ख़ूबसूरत गीत बनाये थे – याला याला दिल ले गयी, दुनिया वालों से दूर जलने वालों से दूर, सूरज ज़रा आ पास आ, अब कहाँ जायें हम, तेरा जल्वा जिसने देखा, ओ मोरा नादान बालमा आदि।

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‘उजाला’ (1959) की शूटिंग चल रही थी। एक दिन अचानक पता चला कि राज कुमार ने शूटिंग में भाग लेने से मना कर दिया है। निर्देशक नरेश सहगल बड़े परेशान हुये। राज कुमार से बात करने पर पता चला कि उन्हें इस बात की नाराज़गी थी कि सारे गाने शम्मी कपूर के ऊपर फ़िल्माये जा रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर भी एक गीत फ़िल्माया जायेगा तब ही वे शूटिंग में हिस्सा लेंगे। राज कुमार को मनाने के लिये फ़िल्म में गाने की सिचुएशन पैदा की गयी। शैलेंद्र साहब ने एक गीत लिखा जिसे मोहम्मद रफ़ी और मुकेश ने आवाज़ दी। पर्दे पर इसे राज कुमार और शम्मी कपूर ने मिल कर गाया – यारों सूरत हमारी पे मत जाओ,  यहाँ भी दिल है यूँ हमसे ना कतराओ।

साभार:- श्री रवींद्रनाथ श्रीवास्तव जी।

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